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ऊबना भी ज़रूरी होता है।

ऊबना (बोर होना) भी ज़रूरी होता है। (नीचे लिखा लेख इस लेख का अनुवाद है।) “तुम्हें ऊबना चाहिए।” थौरिन क्लोसोकी से, हमने बार-बार सुना है कि ऊबना रचनात्मकता (क्रीयेटिविटी) के लिए आवश्यक है , और संगीतकार डैन डीकन इस बात को एन.पी.आर. के साक्षात्कार (इंटरव्यू) में इस यह कह कर रेखांकित कर देते हैं कि, “यू हैव टू बी बोर्ड।“ (तुम्हें ऊबना चाहिए) पूरा साक्षात्कार पढ़ने योग्य है, पर यह उक्ति (क्ओट) तब की है जब डीकन चिंता और तनाव के बारे में बोलते हैं: में वैसा ही इंसान था जो तनाव से प्रेरित होता था; मैं समय सीमा को प्रेरक की तरह इस्तेमाल करता था। मुझे लगता है कि बहुत सारे लोग यह करते हैं, जब वह ऐसा सोचते हैं कि, “मैं बस आखिरी समय तक इंतज़ार करूंगा, और उससे मुझमें काम करने की आग लग जाएगी और मैं काम कर दूंगा।“ और मैं बस यही सोचता रहा, “असल में, यह जीने का बहुत ही खराब तरीका है। क्यों मैं घर बना रहा हूँ और बस यह देखने के लिए उसके तहखाने (बेसमेंट) में आग लगा रहा हूँ कि क्या मैं पूरा घर जलने से पहले छत बना पाऊँगा?” मैंने यह महसूस करना शुरू किया कि आराम करना कितना ज़रूरी है, और आराम करने में, ऊ...

जिस काम से तुम्हें प्यार है, वो करो

जिस काम से तुम्हें प्यार है, वो करो ... सबसे पहले लोग यही बोलते हैं कि, हमें पता नहीं हमें किस काम से प्यार है। मुझे सुन कर थोड़ा दुख होता है, पर फिर मैं अपने आप को देखता हूँ, मुझे भी तो नहीं पता मुझे किससे प्यार है। ऐलबर्ट आइंस्टाईन ने अपने पुत्र को लिखी एक चिट्टी में बोला था कि, सर्वाधिक सीखने के लिए वह काम करो जो करते हुए तुम्हें समय बीत जाने का एहसास ना हो। मैं इसके बारे में सोचता हूँ, तो पाता हूँ कि कंप्यूटर प्रोग्रैम बनाते हुए कितना समय बीत जाता है मुझे पता नहीं लगता। पर और थोड़ा ध्यान से सोचने पर समझ आता है कि किसी भी समस्या का हल ढूंढने में मैं मग्न हो जाता हूँ और मुझे समय का आभास नहीं रहता। तो यह ज़रूरी नहीं कि आपको एकदम समझ आ जाए कि आप को किस काम से प्यार है। इसमें समय लग सकता है। और हो सकता है कि आपकी पहली सोच सटीक ना हो। उसमें संशोधन हो सकते हैं। इसलिए धीरज रखिए। और जब आप इतने महत्वपूर्ण विषय पर सोच ही रहे हैं तो ऐलेन दे बोत्तोन की इस बात पर भी ध्यान रखें कि हमें लगता है कि हम जानते हैं कि सफलता क्या है। पर बहुत बार हमारे विचार उधार के होते हैं। हम टीवी, दोस्त और माता-पिता...

प्रस्तावना

इस भू-संपर्क अभिलेख* का आंशिक प्रयोजन है अंग्रेज़ी के लेख आप लोगों तक हिन्दी भाषा में पहुंचाना। इस भू-लेख* के और भी बहुत निजी प्रयोजन हैं। मेरा पहला महत्वपूर्ण निजी लक्ष्य है, कुंजीपटल** से हिंदी में लिखना सीखना। सम्भवतः उससे भी महत्वपूर्ण लक्ष्य है, भूली हुई हिंदी भाषा का प्रचार, जो आज के पश्चिमी संस्कृति के शोर में गूंगी होती जा रही है। यह भी किसी विकलांग की तरह किसी अनुशासनहीन समाज के उपहास का आशय बन गई है। इसी के साथ पश्चिमी संस्कृती के वाद्य (संगणक/कंप्यूटर)भी इस विकलांगता को सहयोग नहीं दे रहें हैं। हिंदी साहित्य में अच्छे हास्य लेखों की खोज की यात्रा भी मुझे यहाँ लाई है। हिंदी में मुझे बहुत हास्य-व्यंग्य मिले, पर हास्य केवल व्यंग्य की निधि नहीं है। हिंदी साहित्य में मुझे व्यंग्यहीन हास्य और विचित्र काल्पनिक लेखन का अभाव दिखई दिया। मैं कोशिश करूंगा की आप लोगों तक इन शैलियों के, और प्रेरक, उत्कृष्ट (सब से अच्छे) लेख पहुंचाऊं। निराधिकारीकरण ***- --अंत मे मैं आपसे अपनी हिंदी की गल्तियों के लिये माफ़ी मांगना चाहता हूँ। में उसी शोर का बनाया बेहरा हूँ जिससे मैं हिंदी को ...

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